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चूरन भी तुम बेंचो, तो हम क्या करें? जुलाई 2, 2007

Posted by janta in Retail.
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देश में ऐसी कई संस्थाएं हैं जिन्हें उद्योगपति चलाते हैं और अपने निजी हित साधने के लिए सरकार को ब्लैकमेल करने से लेकर जनता का शोषण तक हर नाजायज काम करते हैं. इन संस्थाओं का मुख्य पेशा उद्योगपतियों के लिए दलाली करना है. इनमें फिक्की, सीआईआई, पीएचडी चैम्बर्स और एसोचैम प्रमुख हैं. दुर्भाग्य से जनता इन संस्थाओं को बड़े आदर की नजर से देखते हैं क्योंकि जनता को नहीं पता कि इन संस्थाओं का असली चेहरा क्या है.

आजकल ये संस्थाएं खुदरा कारोबार को संगठित करने की मुहिम पर लगी हुई हैं. अभी हाल में ही एसोचैम नामक एक संस्था ने तथाकथित रूप से एक सर्वे किया है. उसका कहना है कि रिटेल में बड़ी कंपनियों के प्रवेश से देश का उपभोक्ता खुश है. लेकिन एक समस्या आ रही है. इन कंपनियों को दक्ष कामगारों की कमी है. 2010 तक 3 लाख दक्ष कामगारों की जरूरत होगी जिन्हें सामान बेचना आता हो. इस मांग को पूरा करने के लिए अचानक से कई सारे आईआईएम और अन्य छोटे-बड़े संस्थानों ने रिटेल मार्केटिंग का कोर्स शुरू कर दिया है. खबर बनने लगी कि रिटेल सेक्टर में नौकरियों की बाढ़. देश का विकास. उन्नति ही उन्नति. इसका मतलब अब साग-भाजी और चूरन बेचने के लिए हमें आईआईएम की डिग्री चाहिए.

लेकिन दूसरा पहलू क्या है? क्या जनता सचमुच खुश है. एक सर्वे के बारे में मैं आपको बताता हूं. जनता के हित में इसे किया है नवधान्य ने. इस सर्वे में कहा गया है कि जहां-जहां रिलांयस की दुकाने खुली हैं वहां आस-पास के 88 प्रतिशत दुकानदारों की बिक्री गिरी है.  इसमें 45 प्रतिशत दुकानदारों की बिक्री आधी रह गयी है. ये दुकानदार जमे-जमाये हैं. कुछ तो तीस साल से भी अधिक समय से यही काम कर रहे हैं. लेकिन रिलांयस, शुभिच्छा आदि ने   उनकी औकात बता दी है.

इसका आंकलन और अध्ययन हो रहा है कि कितनी नौकरी पैदा होगी लेकिन इस बात का कोई अध्ययन नहीं हो रहा है कि कितनी नौकरी जाएगी. कितने लोग भुखमरी के शिकार होंगे और उन गरीबों का क्या होगा जिनके लिए व्यवस्था ने हर रास्ते बंद कर दिये थे और वे फुटकर बिक्री करके अपनी रोजी-रोटी चला रहे थे. अब वे मंहगी फीस भर नहीं सकते और बिना डिग्री के रिटेल की नौकरी मिलेगी नहीं. अपने से कोई धंधा चला नहीं पायेंगे क्योंकि सामने रिलांयस, बिग बाजार और वालमार्ट खड़ा है. अब आप ही बताईये वे करें तो क्या करें? आप तो मजे से शोरूम में खरीदारी कर लौट आयेंगे, हम कहां जाएं?

मैं पूछता हूं चूरन-चटनी भी रिलांयस बेचे तो हम क्या करें?  

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टिप्पणियाँ»

1. Shastri JC Philip - सितम्बर 6, 2007

“लेकिन इस बात का कोई अध्ययन नहीं हो रहा है कि कितनी नौकरी जाएगी. कितने लोग भुखमरी के शिकार होंगे और उन गरीबों का क्या होगा जिनके लिए व्यवस्था ने हर रास्ते बंद कर दिये थे और वे फुटकर बिक्री करके अपनी रोजी-रोटी चला रहे थे”

आज पहली बार आपके चिट्ठे पर आया एवं आपकी रचनाओं का अस्वादन किया. आप अच्छा लिखते हैं, लेकिन आपकी पोस्टिंग में बहुत समय का अंतराल है. सफल ब्लागिंग के लिये यह जरूरी है कि आप हफ्ते में कम से कम 3 पोस्टिंग करें. अधिकतर सफल चिट्ठाकार हफ्ते में 5 से अधिक पोस्ट करते हैं. किसी भी तरह की मदद चाहिये तो मुझ से संपर्क करे webmaster@sararhi.info — शास्त्री जे सी फिलिप

मेरा स्वप्न: सन 2010 तक 50,000 हिन्दी चिट्ठाकार एवं,
2020 में 50 लाख, एवं 2025 मे एक करोड हिन्दी चिट्ठाकार!!

2. Rahul Sharma - मार्च 28, 2012

Lafzon ki hansi aapke naam kar denge,
Har khushi aap par qurban kar denge,
Jis din hogi kami hamari dosti main,
Uss din zindagi maut ke naam kar denge.


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